भोपाल ।  प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा शासनकाल के दौरान हुए ई-टेडरिंग घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा एफआईआर दर्ज किये जाने के बाद समूची भाजपा में हड़कंप मच गया है। इस मामले में संदेह के दायरे में आने वाली पूर्व पीएचई मंत्री रही कुसुम मेहदेले ने स्पष्ट अरोप लगा दिया है कि घोटाले की फाइल पर उन्होंने नहीं बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंजूरी दी थी। मेहदेले ने साफ किया की उक्त टेंडर पीएचई विभाग से नहीं, जल निगम द्वारा जारी किये गये थे, जिसके अध्यक्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे। साफ संकेत है कि मध्यप्रदेश में हुए सभी घोटालों में लिप्त जो ‘‘चालीस चोर’’ थे, उनके सरगना ‘‘अली बाबा’’ यानि शिवराज सिंह चौहान ही थे।
श्रीमती ओझा ने कहा कि मेहदेले के अनुसार टेंडर की प्रशासकीय मंजूरी और बजट स्वीकृति निगम के अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री ने दी थी। मेहदेले ने यह भी कहा कि जल निगम की किसी भी फाइल पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। यही नहीं निगम की सारी गतिविधियों पर अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री का नियंत्रण था। दरअसल, जल निगम के तीन टेंडरों में छेड़छाड़ को लेकर एफआईआर की गई है। इन तीनों टेंड़रों की राशि लगभग 18 सौ करोड़ रूपए है। 
श्रीमती ओझा ने कहा कि पिछले 15 सालों तक चले जंगलराज की जांचें तो अभी शुरू हुई हैं और केवल ई-टेडरिंग ही नहीं बल्कि व्यापमं, डंपर, पेंशन, वृक्षा रोपण, सिंहस्थ, अवैध उत्खनन सहित सभी घोटालों और मामलों में जब जांच रिपार्टें पेश होंगी तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कई मंत्रियों, विधायकों और नेताओं के साथ ही इन सब के सरगना पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम भी कई घोटालों में सामने आने की पूरी संभावना है। 
श्रीमती ओझा ने अपने बयान के अंत में कहा कि पिछले डेढ़ दशक तक चले माफियाराज के दौरान प्रदेश की जनता को जिस तरह से लूटा गया, प्रदेश के खजाने को जिस तरह से खाली किया गया, उससे नाराज जनता ने भारतीय जनता पार्टी को उखाड़ फेंका और कांग्रेस पार्टी को सत्ता सौंपी। अब कांग्रेस पार्टी अपने कर्तव्यों का निवर्हन करते हुए पूरी तरह से इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि वह हर घोटाले के लिए जिम्मेदार सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएगी।