दुर्ग । पुलगांव थाना के समीप स्थित सांखला मेटल्स में एक मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई। करंट लगने के तुरंत बाद कंपनी प्रबंधन द्वारा उसे कोठारी नर्सिंग होम दुर्ग में ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया एवं उसकी मौत हार्ट अटैक से होना बताया। उसके बाद कंपनी के मालिक गौतमचंद सांखला ने पुलगांव थाने में मजदूर की मौत का कोठारी नर्सिंग होम 
द्वारा दिये गये सर्टिफिकेट के साथ एक आवेदन पत्र दिया जिसे पुलगांव पुलिस ने बडे ही सहजता से लिया। वही जब मृतक के परिजनों और बडी संख्या में ग्रामीणो ने पुलगांव थाना में मौत पर सवाल खडा करते हुए उसकी मौत करंट लगने से होना बताते हुए मृतक का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम करने की  एवं इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने के लिए आवेदन देना चाहा तो उनके आवेदन नही लिया जा रहा था और घंटो इंतजार करना पड़ा बडे ही मुश्किल से उनका घंटो बाद आवेदन लिया गया लेकिन उनको पुलिस द्वारा उसकी पावती नही दी गई। 
इस मौत पर मृतक के चाचा संतोष मानकर एवं अन्य परिजनों और ग्रामीणो ने प्रश्र उठाते हुए कहा है कि उसकी मौत हार्ट अटैक से नही बल्कि यहां काम करते वक्त करंट लगने से हुई है। वहां सुरक्षा का कोई उपाय नही था। सुरक्षा की अनदेखी की गई इसलिए मेरे भतीजे की मौत हुई है। मृतक के परिजनों और थाना आये बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने एवं शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग पुलिस के बड़े अधिकारियों से की है।  
बताया जाता है कि मृतक का एक साल बाद शादी होने वाली थी। मृतक के चाचा ने हमारे प्रतिनिधि को बताया कि मृतक पहले घूम घूमकर बर्तन बेचने का कार्य करता था, और अभी हाल ही में पांच दिन पूर्व ही सांखला मेटल्स में काम पर लगा था  गुरूवार को कटर मशीन जो वायर छिलने का कार्य करती है, उसे चलाने के लिए सागर डहरिया को कहा गया। सागर ने जैसे ही मशीन को छुआ तो उसे करंट लगने जैसा महसूस हुआ तो उसने मशीन चलाने से मना कर दिया। उसके बाद कंपनी के लोगों ने कोलिहापुरी निवासी रामकुमार मानकर 26 वर्ष पिता गरीबां मानकर को मशीन चलाने कहा। रामकुमार मानकर मशीन चला रहा था तभी तीन से चार बजे के लगभग उसे करंट लगा और वह जमीन पर गिर गया। उसे आनन फानन में कंपनी के मालिक गौतमचंद सांखला उसे कोठारी नर्सिंग होम ले गये जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित करते हुए उसकी डेथ बॉडी को जिला अस्पताल की मरच्र्यूरी में रखवा दिया। साथ ही एक आवेदन पुलगाव थाने मे उसके मौत से संबंधित एक आवेदन पत्र दे डाला। एक ओर सांखला मेटल्स के मालिक ने मानवता का परिचय अस्पताल ले जाकर तो जरूर दिया लेकिन परिजनों को मृतक की मौत का ये रहस्य गले नही उतर रहा है कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई। वहीं दूसरी ओर पुलगांव पुलिस की संवेदनशीलता इस मामले में स्पष्ट दिखती है कि पुलगांव पुलिस कंपनी के मालिक के आवेदन पत्र को बड़े ही सहजता के साथ लेती है,और आनन फानन में फैक्ट्री का अवलोकन भी करलेती है लेकिन मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आवेदन लेने व उसकी पावती देने के लिए गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की विधानसभा क्षेत्र के भोले भाले ग्रामीणों को पुलिस किस तरह बेवकूफ बना रही है, वह भी युवा मजदूर की मौत जैसे संवेदनशील मामले में। दुर्ग पुलिस का चेहरा गृहमंत्री के जिले में साफ साफ दिखाई दे रहा है। कहीं न कहीं दुर्ग पुलिस गृहमंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियों की छवि खराब करने में कोई भी कसर नही छोड़ रही है। पुलिस को ऐसे मामले में परिजनों और ग्रामीणों को मौत जैसे गंभीर विषय में ढांढस बंधकर हौसला बढाना चाहिए लेकिन पुलिस वाले ये कहकर मैं अभी नया आया हं, ग्रामीण पुलिस पर विश्वास करे कहकर टालमटोल करते हुए कंपनी मालिक पर मेहरबान नजर आई।