जयपुर: राजस्थान की ग्राम पंचायतों में सरपंच साहब का राज खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. पंचायतों में सोलर लाइट लगाने के नाम पर सरपंच और ग्राम सेवक करोडों के घोटाले कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि पंचायतीराज विभाग घपला रोकने में नाकाम साबित हो रहा है.

जब अपनों को बचाने के लिए चहेते आगे आ जाएं तो सरकारी नियम-कायदे कागजों में दफन हो जाते हैं. प्रदेश में पिछली सरकार के समय सरपंच और ग्रामसेवकों ने मनमर्जी से करोड़ों रुपए की सोलर लाइट लगा दी. जब सरकार ने जांच कराई तो घपले का खेल उजागर हुआ. इस दौरान सभी जिला परिषदों में विशेष अभियान के तहत जांच भी हुई और प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में 43 करोड़ से ज्यादा की वसूली निकाली गई लेकिन अब फिर से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई है. 

भाजपा नेताओं ने उस समय दावा किया था कि वसूली निश्चित समय पर की जाएगी. तीन करोड़ की वसूली होने बाद सरपंचों ने प्रदेशभर में आंदोलन का बिगुल बजा दिया था. इसके बाद कार्रवाई और नोटिस की फाइल कागजों में ही दफन हो गई. अब सरकारी मेहरबानी के चलते ग्राम सेवकों और सरपंचों से 40 करोड़ की वसूली नहीं हो पा रही है. दूसरी ओर पंचायतीराज विभाग के एसीएस राजेश्वर सिंह का कहना है कि विभाग लगातार वसूली का प्रयास कर रहा है, जल्द से सरपंचों से ये वसूली हो पाएंगी.

प्रदेश में वर्ष 2012-13 में पिछली कांग्रेस सरकार के शासनकाल में गांवों को रोशन करने की मंशा से सोलर लाइट खरीदने का निर्णय किया गया था. इसके लिए एक कम्पनी को अधिकृत कर दर भी तय की थी लेकिन सरपंच और ग्राम सेवकों ने मनमर्जी से दूसरी कम्पनियों से निर्धारित दर से अधिक दरों में सोलर लाइट की खरीद कर ली. जब सरकार ने जांच कराई तो घपले का खेल उजागर हुआ. प्रदेश की सभी जिला परिषदों में विशेष अभियान के तहत हुई जांच में 43 करोड़ से ज्यादा की वसूली निकाली गई. भाजपा राज में पहले चरण में चले वसूली अभियान में लगभग 2.19 करोड़ की वसूली हुई. इसके बाद लगभग 80 लाख रुपए की और वसूली हुई, लेकिन 40 करोड़ की वसूली अब भी अटकी हुई है. इनमें से ज्यादातर सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो गया है. ग्रामसेवकों के दूसरी जगह तबादले हो चुके है.

ऐसे में विभाग के सामने वसूली बड़ी चुनौती है.क्योकि पिछले कई मामलों में पंचायतीराज विभाग अब तक वसूली नहीं कर सका है. यह मामला विधानसभा से लेकर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठकों में भी गूंज चुका है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी राज्य सरकार के मागदर्शन की चिट्ठी का हवाला देकर मामलों को टालने पर तुले हुए है. हालांकि वसूली अभियान कई ग्राम पंचायतों ने राशि जमा करा दी थी. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि जो लाइटे लगाए वो भी अब पूरी तरह से खराब हो गई है.